दुनिया के इस बाग में एक और फूल खिला, जिसकी महक से मानो मन का मैल धुल-सा गया हो,

पर न जाने क्यों भगवान उसे काँटे देना भूल गया, तभी तो सब उसे आसानी से तोड़कर, मसलकर, कुचलकर फैंक देते हैं।

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The Journey Begins

Yeeeaaaaaaa, so the journey has been started. Actually, not today, but it started years ago.

ये कहानी शुरू हुई थी सन् 1997 में। 25 दिसम्बर, यह दिन बाकी दिनों जैसा ही था, सर्द हवाएं, ठंडा-सा सूरज, ऊन की चादर और एक चारदीवारी। पर यह दिन किसी और के लिए खास हो न हो, मेरे माता-पिता के लिए किसी त्योहार से कम न था, और क्यों न हो, आज उनके नौ महीनो का इंतजार जो खत्म होने वाला था। चीखों के एक सिलसिले के बाद दूसरा शुरू हुआ, पर इस बार की चीख दर्द भरी नहीं बल्कि चंचल एवं हर्षोल्लास भरी थीं। आंखों में नमी थी, पर उनमें छुपी खुशी असीम थी, क्योंकि उस दिन मेरी माँ ने बेटे को नहीं, एक बेटी को जन्म दिया था! ❤️

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